
इस काण्ड में
- मंगलाचरणमंगलाचरण
- दोहा 3रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- दोहा 12सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना,कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- दोहा 23कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- दोहा 25दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- दोहा 39श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- दोहा 44श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवधवासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- दोहा 51श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- दोहा 60श्रीसीता-राम-संवाद
- दोहा 66श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
- दोहा 68श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- दोहा 73श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- दोहा 75श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- दोहा 79श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- दोहा 86श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- दोहा 90लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- दोहा 99केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- दोहा 105प्रयाग पहुँचना, भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- दोहा 109तापस-प्रकरण
- दोहा 110यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- दोहा 125श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- दोहा 132चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- दोहा 142सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- दोहा 147दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- दोहा 155मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- दोहा 158श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- दोहा 162भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- दोहा 169वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- दोहा 184अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- दोहा 189निषादकी शङ्का और सावधानी
- दोहा 193भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- दोहा 203भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- दोहा 205भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- दोहा 217इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- दोहा 221भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- दोहा 225श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- दोहा 231श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
- दोहा 233भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- दोहा 248वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- दोहा 252श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- दोहा 258श्रीराम-भरतादिका संवाद
- दोहा 273जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- दोहा 279कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- दोहा 287जनक-सुनयना-संवाद,भरतजीकी महिमा
- दोहा 291जनक-वसिष्ठादि-संवाद,इन्द्रकी चिन्ता,सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- दोहा 294श्रीराम-भरत-संवाद
- दोहा 309भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- दोहा 312श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान,भरतजीकी विदाई
- दोहा 314भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
विषय-सूची
- ॐ
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- 6
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- 8
- 9
- 10
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सातों काण्ड
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