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श्रीरामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण, हर श्लोक हिंदी अर्थ सहित। निःशुल्क।

Shri Ram and Mata Sita enthroned at Ayodhya, with Lakshman, Bharat and Shatrughna standing behind and Hanumanji kneeling before them.

रामायण ऑनलाइन पढ़ें

रामचरितमानस

गोस्वामी तुलसीदास

श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास श्री राम की कथा अवधी में कहते हैं। उनके चरित्र से भक्ति और धर्म की शिक्षा मिलती है। यहाँ प्रत्येक पद का अर्थ साथ दिया गया है, जिससे हम समझकर पढ़ सकें।

  1. बालकाण्डश्री राम का जन्म और माता सीता से विवाह।
  2. अयोध्याकाण्डश्री राम का वनवास, भरत का सिंहासन त्याग।
  3. अरण्यकाण्डरावण का सीताहरण, जटायु का संघर्ष, शबरी का आतिथ्य।
  4. किष्किन्धाकाण्डहनुमानजी से मिलन, सुग्रीव से मैत्री, खोज का आरम्भ।
  5. सुन्दरकाण्डहनुमानजी माता सीता को खोजकर उनका सन्देश लाते हैं।
  6. लंकाकाण्डश्री राम की विजय और अयोध्या में राज्याभिषेक।
  7. उत्तरकाण्डरामराज्य की स्थापना, काकभुशुण्डि और गरुड़ का भक्तिविषयक संवाद।

वाल्मीकि रामायण

महर्षि वाल्मीकि

महर्षि वाल्मीकि की वाल्मीकि रामायण संस्कृत में श्री राम की कथा कहती है। इसे आदिकाव्य कहा जाता है। यहाँ प्रत्येक श्लोक के साथ उसका अर्थ दिया गया है, जिससे कथा और उसकी शिक्षा समझ में आए।

  1. बालकाण्डश्री राम का धनुषभंग और माता सीता से विवाह।
  2. अयोध्याकाण्डश्री राम चौदह वर्ष के वनवास पर जाते हैं।
  3. अरण्यकाण्डरावण माता सीता को हरता है, जटायु प्रतिरोध करते हैं।
  4. किष्किन्धाकाण्डसुग्रीव से मैत्री, माता सीता की खोज का आरम्भ।
  5. सुन्दरकाण्डहनुमानजी समुद्र पार करके माता सीता को खोजते हैं।
  6. युद्धकाण्डरावण का वध और श्री राम का अयोध्या आगमन।
  7. उत्तरकाण्डअयोध्या लौटने के बाद श्री राम की आगे की कथा।

आज का रामायण पद

झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू। दुइ कै चारि मागि मकु लेहू॥ रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई॥२॥

मुझे झूठ-मूठ दोष मत दो। चाहे दोके बदले चार माँग लो। रघुकुलमें सदासे यही रीति चली आयी है कि प्राण भले ही चले जायँ, पर वचन नहीं जाता॥ २ ॥

अयोध्याकाण्ड, दोहा 28

इन भावों की चौपाइयाँ

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रामायण के बारे में

रामायण क्या है?

रामायण श्री राम और माता सीता की कथा है, जिसमें उनके आचरण से धर्म की शिक्षा मिलती है। महर्षि वाल्मीकि ने यह कथा संस्कृत में कही। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में इसे अवधी में सुनाया। हिन्दीभाषी परिवारों में प्रायः श्रीरामचरितमानस का ही पाठ होता है और उसे रामायण कहा जाता है।

दोनों ग्रन्थों को जानें

रामायण किसने लिखी?

संस्कृत की वाल्मीकि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि हैं। उन्हें आदिकवि और उनकी रामायण को आदिकाव्य कहा जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवीं शताब्दी में अवधी में श्रीरामचरितमानस की रचना की। उत्तर भारत में बोलचाल का रामायण नाम प्रायः श्रीरामचरितमानस के लिए आता है। इसलिए ग्रन्थ के नाम के साथ उसके रचयिता को जानना उपयोगी है।

रचयिताओं का परिचय

रामायण और रामचरितमानस में क्या अन्तर है?

वाल्मीकि रामायण महर्षि वाल्मीकि की संस्कृत रचना है। श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास श्री राम की कथा अवधी में कहते हैं। दोनों ग्रन्थों में सात काण्ड हैं, पर उनकी भाषा, छन्द और कथा कहने की रीति अलग है। वाल्मीकि रामायण में श्लोक हैं। श्रीरामचरितमानस मुख्यतः चौपाइयों और दोहों में है, जिनका घरों में पाठ होता है।

दोनों ग्रन्थों का अन्तर

रामायण के सात काण्ड कौन से हैं?

गोस्वामी तुलसीदास के श्रीरामचरितमानस में सात काण्ड हैं: बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड और उत्तरकाण्ड। इनमें श्री राम के जन्म से वनवास, माता सीता की खोज, युद्ध और रामराज्य तक की कथा आती है। महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी यही सात भाग हैं। उसके छठे भाग को युद्धकाण्ड अथवा लंकाकाण्ड कहते हैं।

सातों काण्ड पढ़ें

रामायण पढ़ना कहाँ से शुरू करें?

पहली बार पढ़ रहे हों तो गोस्वामी तुलसीदास के श्रीरामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड आरम्भ के लिए उपयुक्त है। इसके साठ दोहों में हनुमानजी का समुद्र पार करना, माता सीता को खोजना और श्री राम के पास सन्देश लाना आता है। प्रत्येक पद अर्थ सहित पढ़ें। पूरी कथा क्रम से पढ़ने के लिए बालकाण्ड से आरम्भ करें।

सुन्दरकाण्ड से आरम्भ करें