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लंकाकाण्ड

Laṅkā-Kāṇḍa · 121 दोहे · 800 पद

इस काण्ड में

  1. मंगलाचरणमंगलाचरण
  2. मंगलाचरणनल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
  3. दोहा 4श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
  4. दोहा 4रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
  5. दोहा 10सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
  6. दोहा 12bश्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
  7. दोहा 14मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
  8. दोहा 17bअंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
  9. दोहा 35bरावणको पुनः मन्दोदरीका समझाना
  10. दोहा 38bअंगद-राम-संवाद
  11. दोहा 38bयुद्धारम्भ
  12. दोहा 47माल्यवान्‌का रावणको समझाना
  13. दोहा 51लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
  14. दोहा 55हनुमान्‌जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
  15. दोहा 57भरतजीके बाणसे हनुमान्‌का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
  16. दोहा 59श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्‌जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
  17. दोहा 61रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
  18. दोहा 64कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
  19. दोहा 71मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
  20. दोहा 75मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
  21. दोहा 78रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
  22. दोहा 81लक्ष्मण-रावण-युद्ध
  23. दोहा 83रावण-मूर्च्छा,रावण-यज्ञ-विध्वंस,राम-रावण-युद्ध
  24. दोहा 88इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
  25. दोहा 92रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध
  26. दोहा 94रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
  27. दोहा 95घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
  28. दोहा 98त्रिजटा-सीता-संवाद
  29. दोहा 101bराम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
  30. दोहा 103मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
  31. दोहा 106विभीषणका राज्याभिषेक
  32. दोहा 106हनुमान्‌जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
  33. दोहा 109bदेवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
  34. दोहा 115विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन,शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
  35. दोहा 117bविभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
  36. दोहा 118cपुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
  37. दोहा 121bश्रीरामचरितकी महिमा

विषय-सूची

  1. ॐ
  2. 1
  3. 2
  4. 3
  5. 4
  6. 5
  7. 6
  8. 7
  9. 8
  10. 9
  11. 10
  12. 11b
  13. 12b
  14. 13b
  15. 14
  16. 15b
  17. 16b
  18. 17b
  19. 18
  20. 19
  21. 20
  22. 21
  23. 22b
  24. 23f
  25. 24
  26. 25
  27. 26
  28. 27
  29. 28
  30. 29
  31. 30
  32. 31b
  33. 32b
  34. 33b
  35. 34b
  36. 35b
  37. 36
  38. 37
  39. 38b
  40. 39
  41. 40
  42. 41
  43. 42
  44. 43
  45. 44
  46. 45
  47. 46
  48. 47
  49. 48b
  50. 49
  51. 50
  52. 51
  53. 52
  54. 53
  55. 54
  56. 55
  57. 56
  58. 57
  59. 58
  60. 59
  61. 60b
  62. 61
  63. 62
  64. 63
  65. 64
  66. 65
  67. 66
  68. 67
  69. 68
  70. 69
  71. 70
  72. 71
  73. 72
  74. 73
  75. 74b
  76. 75
  77. 76
  78. 77
  79. 78
  80. 79
  81. 80c
  82. 81
  83. 82
  84. 83
  85. 84
  86. 85
  87. 86
  88. 87
  89. 88
  90. 89
  91. 90
  92. 91
  93. 92
  94. 93
  95. 94
  96. 95
  97. 96
  98. 97
  99. 98
  100. 99
  101. 100
  102. 101b
  103. 102
  104. 103
  105. 104
  106. 105
  107. 106
  108. 107
  109. 108
  110. 109b
  111. 110
  112. 111
  113. 112
  114. 113
  115. 114b
  116. 115
  117. 116d
  118. 117b
  119. 118c
  120. 119b
  121. 120b
  122. 121b

सातों काण्ड

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