
इस काण्ड में
- मंगलाचरणमंगलाचरण
- दोहा 1जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- दोहा 2अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- दोहा 4श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- दोहा 6bश्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- दोहा 9राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना
- दोहा 9सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- दोहा 13पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- दोहा 16शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- दोहा 20bशूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्नि-प्रवेश और माया-सीता
- दोहा 22मारीचप्रसंग और स्वर्णमृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- दोहा 27श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- दोहा 28जटायु-रावण-युद्ध
- दोहा 29bश्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- दोहा 32कबन्ध-उद्धार
- दोहा 34शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- दोहा 40नारद-राम-संवाद
- दोहा 44संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
विषय-सूची
सातों काण्ड
गीताप्रेस, गोरखपुर का संस्करण। पुस्तक खरीदें