
इस काण्ड में
- मंगलाचरणमंगलाचरण
- मंगलाचरणहनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट,छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- दोहा 3लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार,लङ्कामें प्रवेश
- दोहा 4हनुमान्-विभीषण-संवाद
- दोहा 8हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दुःखी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- दोहा 10श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- दोहा 12श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- दोहा 17हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- दोहा 20हनुमान्-रावण-संवाद
- दोहा 25लङ्का-दहन
- दोहा 25लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- दोहा 25समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश,सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- दोहा 35श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
- दोहा 35मन्दोदरी-रावण-संवाद
- दोहा 37रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- दोहा 41विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- दोहा 49bसमुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- दोहा 53दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- दोहा 57समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- दोहा 59श्रीराम-गुणगानकी महिमा
विषय-सूची
सातों काण्ड
गीताप्रेस, गोरखपुर का संस्करण। पुस्तक खरीदें