
इस काण्ड में
- मंगलाचरणमंगलाचरण
- दोहा 1श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- दोहा 5सुग्रीवका दुःख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- दोहा 7सुग्रीवका वैराग्य
- दोहा 7बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- दोहा 9ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजीद्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- दोहा 12वर्षा-ऋतु-वर्णन
- दोहा 15bशरद्-ऋतु-वर्णन
- दोहा 16श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- दोहा 21सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- दोहा 25गुफामें तपस्विनीके दर्शन
- दोहा 25वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- दोहा 28समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
- दोहा 30bश्रीरामगुणका माहात्म्य
विषय-सूची
सातों काण्ड
गीताप्रेस, गोरखपुर का संस्करण। पुस्तक खरीदें