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किष्किन्धाकाण्ड

Kiṣkindhā-Kāṇḍa · 30 दोहे · 193 पद

इस काण्ड में

  1. मंगलाचरणमंगलाचरण
  2. दोहा 1श्रीरामजीसे हनुमान्‌जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
  3. दोहा 5सुग्रीवका दुःख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
  4. दोहा 7सुग्रीवका वैराग्य
  5. दोहा 7बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
  6. दोहा 9ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजीद्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
  7. दोहा 12वर्षा-ऋतु-वर्णन
  8. दोहा 15bशरद्-ऋतु-वर्णन
  9. दोहा 16श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
  10. दोहा 21सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
  11. दोहा 25गुफामें तपस्विनीके दर्शन
  12. दोहा 25वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
  13. दोहा 28समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्‌जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
  14. दोहा 30bश्रीरामगुणका माहात्म्य

विषय-सूची

  1. ॐ
  2. 1
  3. 2
  4. 3
  5. 4
  6. 5
  7. 6
  8. 7
  9. 8
  10. 9
  11. 10
  12. 11
  13. 12
  14. 13
  15. 14
  16. 15b
  17. 16
  18. 17
  19. 18
  20. 19
  21. 20
  22. 21
  23. 22
  24. 23
  25. 24
  26. 25
  27. 26
  28. 27
  29. 28
  30. 29
  31. 30b

सातों काण्ड

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