मंगल भवन अमंगल हारी
चौ०
बंदउँ बालरूप सोइ रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू॥ मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥ २ ॥
भावार्थ
मैं उन्हीं श्रीरामचन्द्रजीके बालरूपकी वन्दना करता हूँ, जिनका नाम जपनेसे सब सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। मङ्गलके धाम, अमङ्गलके हरनेवाले और श्रीदशरथजीके आँगनमें खेलनेवाले वे ( बालरूप ) श्रीरामचन्द्रजी मुझपर कृपा करें॥२॥
Meaning (English)
“Śrī Rāma do I reverence in the form of a child, the repetition of whose Name brings all kinds of success within our easy reach. May that Home of bliss and the Bane of woe take compassion on me—He, the child-Rāma, who sports in the courtyard of king Daśaratha.” (2)
गीताप्रेस, गोरखपुर का संस्करण। पुस्तक खरीदें