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मंगल रंग

रामायण: पार्ट वन (2026), संगीत ए.आर. रहमान

मंगल रंग, Ramayana: Part One (2026) में श्री राम और माता सीता के विवाह का गीत है। इसके बोल फिल्म के लिए लिखे गए हैं। यहाँ गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के विवाह प्रसंग का भाव समझाया गया है। राजा जनक माता सीता को श्री राम को समर्पित करते हैं, दोनों अग्नि के फेरे लेते हैं और श्री राम माता सीता के सिर में सिंदूर भरते हैं।

आधिकारिक वीडियो देखें · T-Series

इस गीत के पीछे के पद

हिमवंत जिमि गिरिजा महेसहि हरिहि श्री सागर दई। तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नई॥ क्यों करै बिनय बिदेहु कियो बिदेहु मूरति सावँरीं। करि होमु बिधिवत गाँठि जोरी होन लागीं भावँरीं॥ ४ ॥

Himavant jimi Girija Mahesahi Harihi Shri saagar daee.Timi Janak Ramahi Siya samarapi biswa kal keerati naee.Kyon karai binay Bidehu kiyo Bidehu moorati saanvareen.Kari homu bidhivat gaanthi jori hon laageen bhaanvareen.

कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं। नयन लाभु सब सादर लेहीं॥ जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी॥ १ ॥

Kuanru kuanri kal bhaanvari deheen.Nayan laabhu sab saadar leheen.Jaai na barani manohar jori.Jo upama kachhu kahaun so thori.

प्रमुदित मुनिन्ह भावँरीं फेरीं। नेगसहित सब रीति निबेरीं॥ राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं॥ ४ ॥

Pramudit muninh bhaanvareen phereen.Neg sahit sab reeti nibereen.Ram Siya sir sendur deheen.Sobha kahi na jaati bidhi keheen.

हर पंक्ति का अर्थ

हिमवंत जिमि गिरिजा महेसहि हरिहि श्री सागर दई। तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नई॥ क्यों करै बिनय बिदेहु कियो बिदेहु मूरति सावँरीं। करि होमु बिधिवत गाँठि जोरी होन लागीं भावँरीं॥ ४ ॥

जैसे हिमवान्‌ने शिवजीको पार्वतीजी और सागरने भगवान् विष्णुको लक्ष्मीजी दी थीं, वैसे ही जनकजीने श्रीरामचन्द्रजीको सीताजी समर्पित कीं, जिससे विश्वमें सुन्दर नवीन कीर्ति छा गयी। विदेह ( जनकजी ) कैसे विनती करें! उस साँवली मूर्तिने तो उन्हें सचमुच विदेह ( देहकी सुध-बुधसे रहित ) ही कर दिया। विधिपूर्वक हवन करके गठजोड़ी की गयी और भाँवरें होने लगीं॥

बालकाण्ड, दोहा 324 →

कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं। नयन लाभु सब सादर लेहीं॥ जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी॥ १ ॥

वर और कन्या सुन्दर भाँवरें दे रहे हैं। सब लोग आदरपूर्वक [ उन्हें देखकर ] नेत्रोंका परम लाभ ले रहे हैं। मनोहर जोड़ीका वर्णन नहीं हो सकता, जो कुछ उपमा कहूँ वही थोड़ी होगी॥

बालकाण्ड, दोहा 325 →

प्रमुदित मुनिन्ह भावँरीं फेरीं। नेगसहित सब रीति निबेरीं॥ राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं॥ ४ ॥

मुनियोंने आनन्दपूर्वक भाँवरें फिरायीं और नेगसहित सब रीतियोंको पूरा किया। श्रीरामचन्द्रजी सीताजीके सिरमें सिंदूर दे रहे हैं; यह शोभा किसी प्रकार भी कही नहीं जाती॥

बालकाण्ड, दोहा 325 →

गीत के बारे में

मंगल रंग, Ramayana: Part One (2026) का गीत है। गीत के क्रेडिट में T-Series का नाम है। संगीत ए.आर. रहमान ने दिया है और बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने गाया है। यह फिल्म में श्री राम और माता सीता के विवाह का गीत है। इसके बोल फिल्म के लिए लिखे गए हैं और यहाँ उन्हें दोहराया नहीं गया है। यहाँ रामचरितमानस के छंद और चौपाइयों से गोस्वामी तुलसीदास का कहा विवाह प्रसंग समझाया गया है।

Ramayana: Part One (2026), T-Series. Music by A.R. Rahman. Lyrics by Kumar Vishwas. Vocals by Arijit Singh and Shreya Ghoshal.

प्रसंग

राजा जनक माता सीता को श्री राम को समर्पित करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास इसकी तुलना हिमवान के पार्वतीजी को शिवजी को और सागर के लक्ष्मीजी को भगवान विष्णु को सौंपने से करते हैं। जनकजी विदेह कहलाते हैं। श्री राम की साँवली मूर्ति को देखकर वे अपनी देह की सुध भी भूल जाते हैं। विधि से हवन होता है। गठजोड़ी बाँधी जाती है और भाँवरें शुरू होती हैं। श्री राम और माता सीता फेरे लेते हैं। सब लोग उन्हें आदर से देखते हैं और अपने नेत्रों का परम लाभ पाते हैं। इस जोड़ी की शोभा के आगे हर उपमा छोटी पड़ती है। मुनि आनंद से फेरे कराते हैं और नेग सहित विवाह की रीतियाँ पूरी करते हैं। फिर श्री राम माता सीता के सिर में सिंदूर भरते हैं। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि यह शोभा कही नहीं जाती।

यह गीत क्या सिखाता है

श्री राम से प्रेम हो तो काम में भी आदर आता है। जनकजी के समर्पण और विवाह की रीतियों में हम यही देखते हैं।

यहाँ बिदेहु शब्द पर ध्यान दीजिए। यह जनकजी का नाम है। श्री राम को देखकर वे देह की सुध भूल जाते हैं, इसलिए यही शब्द उनकी उस समय की दशा भी बताता है। उनका मन प्रभु में लगा है। फिर भी विवाह की विधि पूरी होती है। हवन, गठजोड़ी और फेरों का अपना क्रम है।

हम कभी मान लेते हैं कि भक्ति में डूबने पर रीति निभाने का ध्यान नहीं रहेगा। यहाँ प्रेम और विधि साथ हैं। मुनि आनंद से फेरे कराते हैं। देखने वाले भी आदर से श्री राम और माता सीता का दर्शन करते हैं।

आज इन पंक्तियों को धीरे पढ़िए। जनकजी का समर्पण याद कीजिए। फिर घर का कोई एक काम श्री राम और माता सीता का स्मरण करते हुए, पूरे ध्यान और आदर से कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल रंग किसने गाया है और इसका संगीत किसने दिया है?

मंगल रंग अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने गाया है। Ramayana: Part One (2026) के इस गीत का संगीत ए.आर. रहमान ने दिया है।

मंगल रंग का अर्थ क्या है?

मंगल रंग का अर्थ है शुभ रंग। यह फिल्म में श्री राम और माता सीता के विवाह के गीत का नाम है।

इस पृष्ठ की विवाह वाली पंक्तियाँ कहाँ से हैं?

ये गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के बालकाण्ड से हैं: दोहा 324 के बाद छंद 4 और दोहा 325 के बाद चौपाइयाँ 1 और 4। इनमें जनकजी का समर्पण, विवाह के फेरे और श्री राम का माता सीता के सिर में सिंदूर भरना आता है।

रामचरितमानस की इन पंक्तियों से क्या सीख मिलती है?

श्री राम में जनकजी की तल्लीनता हमें प्रेम से समर्पण करना सिखाती है। मुनि आनंद से विवाह की विधि पूरी करते हैं और सब लोग आदर से दर्शन करते हैं। हम भी अपने काम में भक्ति और पूरा ध्यान रखें।

क्या मंगल रंग के बोल गोस्वामी तुलसीदास ने लिखे हैं?

गीत के बोल कुमार विश्वास ने फिल्म के लिए लिखे हैं। वे यहाँ नहीं दोहराए गए हैं। इस पृष्ठ पर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस से विवाह का प्रसंग समझाया गया है।

इसे ऐसे भी लिखा जाता है: Mangal Rang · मंगल रंग · Mangal Rang Ramayana · Mangal Rang Ramayan · Mangal Rang A R Rahman · Mangal Rang Arijit Singh · Mangal Rang Shreya Ghoshal · Mangal Rang Kumar Vishwas

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