दोहा 77b
अरुन पानि नख करज मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर॥ कंध बाल केहरि दर ग्रीवा। चारु चिबुक आनन छबि सींवा॥१॥
भावार्थ
लाल-लाल हथेलियाँ, नख और अँगुलियाँ मनको हरनेवाले हैं और विशाल भुजाओंपर सुन्दर आभूषण हैं। बालसिंह ( सिंहके बच्चे ) के-से कंधे और शंखके समान ( तीन रेखाओंसे युक्त ) गला है। सुन्दर ठुड्डी है और मुख तो छबिकी सीमा ही है॥१॥
कलबल बचन अधर अरुनारे। दुइ दुइ दसन बिसद बर बारे॥ ललित कपोल मनोहर नासा। सकल सुखद ससि कर सम हासा॥२॥
भावार्थ
कलबल ( तोतले ) वचन हैं, लाल-लाल ओंठ हैं। उज्ज्वल, सुन्दर और छोटी-छोटी [ ऊपर और नीचे ] दो-दो दँतुलियाँ हैं। सुन्दर गाल, मनोहर नासिका और सब सुखोंको देनेवाली चन्द्रमाकी [ अथवा सुख देनेवाली समस्त कलाओंसे पूर्ण चन्द्रमाकी ] किरणोंके समान मधुर मुसकान है॥२॥
नील कंज लोचन भव मोचन। भ्राजत भाल तिलक गोरोचन॥ बिकट भृकुटि सम श्रवन सुहाए। कुंचित कच मेचक छबि छाए॥३॥
भावार्थ
नीले कमलके समान नेत्र जन्म-मृत्यु [ के बन्धन ] से छुड़ानेवाले हैं। ललाटपर गोरोचनका तिलक सुशोभित है। भौंहें टेढ़ी हैं, कान सम और सुन्दर हैं, काले और घुँघराले केशोंकी छबि छा रही है॥३॥
पीत झीनि झगुली तन सोही। किलकनि चितवनि भावति मोही॥ रूप रासि नृप अजिर बिहारी। नाचहिं निज प्रतिबिंब निहारी॥४॥
भावार्थ
पीली और महीन झँगुली शरीरपर शोभा दे रही है। उनकी किलकारी और चितवन मुझे बहुत ही प्रिय लगती है। राजा दशरथजीके आँगनमें विहार करनेवाले रूपकी राशि श्रीरामचन्द्रजी अपनी परछाहीं देखकर नाचते हैं, ॥४॥
मोहि सन करहिं बिबिधि बिधि क्रीड़ा। बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा॥ किलकत मोहि धरन जब धावहिं। चलउँ भागि तब पूप देखावहिं॥५॥
भावार्थ
और मुझसे बहुत प्रकारके खेल करते हैं, जिन चरित्रोंका वर्णन करते मुझे लज्जा आती है! किलकारी मारते हुए जब वे मुझे पकड़ने दौड़ते और मैं भाग चलता, तब मुझे पूआ दिखलाते थे॥५॥
आवत निकट हँसहिं प्रभु भाजत रुदन कराहिं। जाउँ समीप गहन पद फिरि फिरि चितइ पराहिं॥७७ (क)॥
भावार्थ
मेरे निकट आनेपर प्रभु हँसते हैं और भाग जानेपर रोते हैं और जब मैं उनका चरण स्पर्श करनेके लिये पास जाता हूँ, तब वे पीछे फिर-फिरकर मेरी ओर देखते हुए भाग जाते हैं॥७७ ( क )॥
प्राकृत सिसु इव लीला देखि भयउ मोहि मोह। कवन चरित्र करत प्रभु चिदानंद संदोह॥७७ (ख)॥
भावार्थ
साधारण बच्चों-जैसी लीला देखकर मुझे मोह ( शङ्का ) हुआ कि सच्चिदानन्दघन प्रभु यह कौन [ महत्त्वका ] चरित्र ( लीला ) कर रहे हैं॥७७ ( ख )॥
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