प्रनवउँ पवनकुमार
सो०
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥१७॥
भावार्थ
मैं पवनकुमार श्रीहनुमान्जीको प्रणाम करता हूँ, जो दुष्टरूपी वनको भस्म करनेके लिये अग्निरूप हैं, जो ज्ञानकी घनमूर्ति हैं और जिनके हृदयरूपी भवनमें धनुष-बाण धारण किये श्रीरामजी निवास करते हैं॥१७॥
Meaning (English)
I greet Hanumān, the son of the wind-god, an embodiment of wisdom, who is fire, as it were, for the forest of the wicked, and in the abode of whose heart resides Śrī Rāma, wielding a bow and arrows. (17)
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