रामश्च सीतया सार्धं
रामायण: पार्ट वन (2026), संगीत ए.आर. रहमान
Sita's Aspiration महर्षि वाल्मीकि की रामायण के एक संस्कृत श्लोक का संगीत रूप है। इसमें विवाह के बाद अयोध्या में श्री राम और माता सीता के सुख का वर्णन है। गीत सुनते हुए हम उनके जीवन के इस प्रसंग से परिचित होते हैं, जिसे महर्षि वाल्मीकि ने अपने काव्य में स्थान दिया है।
सम्पूर्ण बोल
रामश्च सीतया सार्धं विजहार बहूनृतून्। मनस्वी तद्गतमनास्तस्या हृदि समर्पितः॥
Raamashcha Seetayaa Saardham Vijahaara BahoonritoonManasvee Tadgatamanaastasyaa Hridi Samarpitah
हर पंक्ति का अर्थ
रामश्च सीतया सार्धं विजहार बहूनृतून्। मनस्वी तद्गतमनास्तस्या हृदि समर्पितः॥
श्रीरामचन्द्रजी सदा सीताके हृदयमन्दिरमें विराजमान रहते थे तथा मनस्वी श्रीरामका मन भी सीतामें ही लगा रहता था; श्रीरामने सीताके साथ अनेक ऋतुओंतक विहार किया ॥ सीता श्रीरामको बहुत ही प्रिय थीं; क्योंकि वे अपने पिता राजा जनकद्वारा श्रीरामके हाथमें पत्नीरूपसे समर्पित की गयी थीं । सीताके पातिव्रत्य आदि गुणसे तथा उनके सौन्दर्य-गुणसे भी श्रीरामका उनके प्रति अधिकाधिक प्रेम बढ़ता रहता था; इसी प्रकार सीताके हृदयमें भी उनके पति श्रीराम अपने गुण और सौन्दर्यके कारण द्विगुण प्रीतिपात्र बनकर रहते थे ॥
Valmiki Ramayana, Bala Kanda, Sarga 77, shlokas 25 and 26
गीत के बारे में
रामायण: पार्ट वन (2026), टी सीरीज़ में यह श्लोक Sita's Aspiration गीत के रूप में प्रस्तुत है। संगीत ए. आर. रहमान का है। स्वर ए. आर. अमीन, वैशाली सामंत, रक्षिता सुरेश और अंतरा नंदी के हैं। गीत के शब्द महर्षि वाल्मीकि की रामायण के बालकाण्ड, सर्ग 77 का एक श्लोक हैं।
Ramayana: Part One (2026), T-Series. Music by A.R. Rahman. Vocals by A.R. Ameen, Vaishali Samant, Rakshita Suresh and Antara Nandy. The lyric is a shloka of Maharshi Valmiki's Ramayana, Bala Kanda, Sarga 77.
प्रसंग
सर्ग 77 में विवाह के बाद बारात अयोध्या लौटती है। नगर में नवविवाहित दम्पतियों का स्वागत होता है। इसके बाद भरत अपने नाना के पास केकय देश चले जाते हैं। शत्रुघ्न भी उनके साथ जाते हैं। श्री राम अयोध्या में रहकर पिता, माताओं और बड़ों की सेवा करते हैं। वे प्रजा के हित का भी ध्यान रखते हैं। फिर महर्षि वाल्मीकि उनके गृहस्थ जीवन की ओर आते हैं। माता सीता के साथ अनेक ऋतुएँ बीतती हैं। इसी प्रसंग का श्लोक बताता है कि श्री राम का मन माता सीता में लगा है और हृदय उन्हें समर्पित है।
यह गीत क्या सिखाता है
प्रेम में प्रिय का ध्यान सहज ही रहता है। महर्षि वाल्मीकि श्री राम के समर्पित हृदय का वर्णन करते हैं और माता सीता के बढ़ते प्रेम की बात भी कहते हैं। दोनों एक दूसरे के मन की बात समझते हैं। इस प्रेम में दोनों का ध्यान एक दूसरे की ओर है। प्रिय की इच्छा और भाव का आदर इसी स्नेह से आता है।
उनके दाम्पत्य का स्मरण करते समय हम इसी भाव पर मन लगा सकते हैं। श्री राम के हृदय में माता सीता हैं और माता सीता के हृदय में श्री राम। गीत सुनते हुए कुछ क्षण दोनों का साथ स्मरण करें। मन भटके तो उनके नाम लेकर फिर उसी स्मरण में लौट आएँ। फिर उनके चरणों में प्रार्थना करें: हमारा मन भी आपके प्रेम और सेवा में लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Sita's Aspiration किसने गाया है?
रामायण: पार्ट वन (2026) का यह गीत ए. आर. अमीन, वैशाली सामंत, रक्षिता सुरेश और अंतरा नंदी ने गाया है।
Sita's Aspiration का संगीत किसने दिया है?
रामायण: पार्ट वन (2026), टी-सीरीज़ के इस गीत का संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है।
रामश्च सीतया सार्धं का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है, श्री राम माता सीता के साथ। पूरी दो पंक्तियाँ बताती हैं कि श्री राम अनेक ऋतुएँ माता सीता के साथ सुख से बिताते हैं। उनका मन माता सीता में लगा है और हृदय उन्हें समर्पित है।
Sita's Aspiration की संस्कृत पंक्तियाँ कहाँ से हैं?
ये पंक्तियाँ महर्षि वाल्मीकि की रामायण के बालकाण्ड, सर्ग 77 के श्लोक 25 और 26 से हैं। प्रसंग विवाह के बाद श्री राम और माता सीता के साथ रहने का है।
इन श्लोकों से प्रेम की क्या सीख मिलती है?
श्री राम का मन और हृदय माता सीता को समर्पित है। आगे उनके गुणों और रूप से प्रेम बढ़ने तथा माता सीता के मन में दुगुना प्रेम होने की बात आती है। हम भी अपनों की बात ध्यान से सुनें और उनके अच्छे गुणों को पहचानें।
इसे ऐसे भी लिखा जाता है: Sita's Aspiration · Sitas Aspiration · Sita Aspiration · Seeta's Aspiration · Ramashcha Sitaya Sardham · Ramascha Seethaya Sardham · Raamashcha Seetayaa Saardham · रामश्च सीतया सार्धं