पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
मीराबाई
इस भजन में श्री राम का नाम ऐसा धन है, जो खर्च करने से घटता नहीं और जिसे कोई चोर ले नहीं सकता। भक्त रोज की पूजा और भजन की बैठकों में इसे गाकर सतगुरु की कृपा के लिए अपना आभार जताते हैं।
सम्पूर्ण बोल
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो॥
Payo ji maine Ram ratan dhan payo.
कुछ गायन शैलियों में 'पायो जी मैं तो राम रतन धन पायो' या 'पायो जी म्हे तो' सुनते हैं।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥१॥
Vastu amolak di mere satguru, kirpa kar apnayo.
कुछ रूपों में 'दी म्हारे सतगुरु' गाया जाता है।
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो॥२॥
Janam janam ki poonji payi, jag mein sabhi khovayo.
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन दिन बढ़त सवायो॥३॥
Kharachai nahin koi chor na levai, din din badhat savayo.
अक्सर 'खरच न खूटै चोर न लूटै' गाया जाता है।
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो॥४॥
Sat ki naav khevatiya satguru, bhavsagar tar aayo.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख हरख जस गायो॥५॥
Meera ke Prabhu Giridhar Nagar, harakh harakh jas gayo.
'हरष हरष जस गायो' भी गाया जाता है।
पदों का अर्थ
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो॥
मुझे श्रीराम के नाम का रत्न मिल गया है। यही मेरा धन है, जिसे पाकर मैं प्रसन्न हूँ।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥१॥
मेरे सतगुरु ने मुझे यह अमोल धन दिया है। उन्होंने कृपा करके मुझे अपना लिया है।
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो॥२॥
मुझे जन्मों की कमाई मिल गई है। संसार में जो कुछ जोड़ा था, वह सब खो गया।
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन दिन बढ़त सवायो॥३॥
इस धन को खर्च करने से यह घटता नहीं और कोई चोर इसे ले नहीं सकता। यह दिन पर दिन बढ़ता जाता है।
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो॥४॥
सत्य की नाव है और सतगुरु उसे पार ले जाने वाले हैं। उनके सहारे मैं संसार के दुखों के सागर से पार आ गई हूँ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख हरख जस गायो॥५॥
मीरा अपने प्रभु गिरधर नागर का यश बड़े आनंद से गाती हैं।
इस रचना के बारे में
यह पद मीरा बाई की रचना के रूप में प्रसिद्ध है। मीरा बृहत् पदावली में यह पद 287 है और इसके साथ राग आसा/मांड का उल्लेख है। बेलवेडियर शब्दावली का पाठ भी इससे बहुत मिलता है। मीरा बाई के पद गायन की मौखिक परंपरा और पांडुलिपियों से चले आए हैं, इसलिए उनके शब्दों में अंतर मिलते हैं। गाते समय पहली पंक्ति को टेक की तरह दोहराया जा सकता है। मीरा बृहत् पदावली का पद 529 भी मिलते हुए शब्दों से शुरू होता है, पर वह अलग पद है। दोनों को एक न समझें।
इसके पीछे की कथा
गोस्वामी तुलसीदास भी रामचरितमानस में नाम की महिमा कहते हैं: रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें॥ सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें॥३॥ (रामचरितमानस, बालकाण्ड, दोहा 21 से पहले की चौपाई 3।)
नाम जाने बिना हाथ में रखी वस्तु का रूप भी पहचाना नहीं जाता। प्रभु का रूप देखे बिना भी उनका नाम स्मरण करने पर वह रूप विशेष प्रेम के साथ हृदय में आ जाता है। तुलसीदासजी यहाँ नाम और रूप का संबंध बताते हैं। भजन में नाम पाने का आनंद व्यक्त होता है।
यह रचना क्या सिखाती है
भजन में प्रभु का नाम ऐसा धन है जिसे कोई चोर ले नहीं सकता और जो दिन दिन बढ़ता है। पैसा खर्च करने से घटता है। नाम लेने से नाम चुकता नहीं। किसी और के साथ गाने से भी हमारे पास कम नहीं हो जाता। इस धन को ताले में रखने की ज़रूरत नहीं। काम और चिंताओं के बीच भी श्रीराम का नाम याद करने से उनके प्रति हमारा प्रेम बढ़ता है।
मीरा बाई इस धन को पाकर सतगुरु की कृपा याद करती हैं और प्रभु का यश गाती हैं। कभी गाते समय मन भटकता है, कभी भाव कम आता है। भाव को जबरन लाने की ज़रूरत नहीं। आज थोड़ा समय मिले तो टेक एक बार धीरे गा लें। कुछ पल श्रीराम के नाम पर मन रहने दें। भटके तो प्यार से फिर नाम पर ले आएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि मुझे श्रीराम के नाम का रत्न धन के रूप में मिल गया है।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो किसने लिखा है?
परंपरा में यह पद मीरा बाई की रचना माना जाता है। इसे उनके लेखन का निश्चित प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो कब गा सकते हैं?
इसे रोज की पूजा में, मिलकर भजन करते समय या प्रभु का स्मरण करने की इच्छा होने पर गा सकते हैं।
इस भजन को गाने का भक्तिभाव से क्या लाभ है?
यह भजन सतगुरु की कृपा के लिए कृतज्ञता और प्रभु के नाम से प्रेम रखने की प्रेरणा देता है। प्रार्थना या रोज के कामों के बीच श्रीराम का स्मरण करने के लिए इसके शब्द गाए जा सकते हैं।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की पंक्तियाँ कहाँ से हैं?
ये मीरा बाई से जुड़ी भजन परंपरा की पंक्तियाँ हैं। यह रामचरितमानस की चौपाई नहीं है। गाने में प्रचलित "खरच न खूटै चोर न लूटै" छपे हुए पद के "खरचै नहिं कोई चोर न लेवै" का अलग रूप है।
इसे ऐसे भी लिखा जाता है: Payoji Maine Ram Ratan Dhan Payo · Payo Ji Maine Ram Ratan Dhan Payo · Payo Ji Main To Ram Ratan Dhan Payo · Paayo Ji Maine Ram Ratan Dhan Paayo · Ram Ratan Dhan Payo Meera Bhajan · पायो जी मैंने राम रतन धन पायो · पायो जी मैं तो राम रतन धन पायो · पायो जी म्हे तो राम रतन धन पायो