---
title: "उत्तरकाण्ड दोहा 67b"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/uttar-kand/doha-67b"
lang: "hi"
---

# उत्तरकाण्ड · दोहा 67b

**चौ०** 
> जेहि बिधि कपिपति कीस पठाए। सीता खोज सकल दिसि धाए॥  
> बिबर प्रबेस कीन्ह जेहि भाँती। कपिन्ह बहोरि मिला संपाती॥१॥

भावार्थ: जिस प्रकार वानरराज सुग्रीवने वानरोंको भेजा और वे सीताजीकी खोजमें जिस प्रकार सब दिशाओंमें गये, जिस प्रकार उन्होंने बिलमें प्रवेश किया और फिर जैसे वानरोंको सम्पाती मिला, वह कथा कही॥ १ ॥

**चौ०** 
> सुनि सब कथा समीरकुमारा। नाघत भयउ पयोधि अपारा॥  
> लंकाँ कपि प्रबेस जिमि कीन्हा। पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा॥२॥

भावार्थ: संपातीसे सब कथा सुनकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी जिस तरह अपार समुद्रको लाँघ गये, फिर हनुमान्‌जीने जैसे लङ्कामें प्रवेश किया और फिर जैसे सीताजीको धीरज दिया, सो सब कहा॥ २ ॥

**चौ०** 
> बन उजारि रावनहि प्रबोधी। पुर दहि नाघेउ बहुरि पयोधी॥  
> आए कपि सब जहँ रघुराई। बैदेही की कुसल सुनाई॥३॥

भावार्थ: अशोकवनको उजाड़कर, रावणको समझाकर, लङ्कापुरीको जलाकर फिर जैसे उन्होंने समुद्रको लाँघा और जिस प्रकार सब वानर वहाँ आये जहाँ श्रीरघुनाथजी थे और आकर श्रीजानकीजीकी कुशल सुनायी, ॥ ३ ॥

**चौ०** 
> सेन समेति जथा रघुबीरा। उतरे जाइ बारिनिधि तीरा॥  
> मिला बिभीषन जेहि बिधि आई। सागर निग्रह कथा सुनाई॥४॥

भावार्थ: फिर जिस प्रकार सेनासहित श्रीरघुवीर जाकर समुद्रके तटपर उतरे और जिस प्रकार विभीषणजी आकर उनसे मिले, वह सब और समुद्रके बाँधनेकी कथा उसने सुनायी॥ ४ ॥

**दो०** 
> सेतु बाँधि कपि सेन जिमि उतरी सागर पार।  
> गयउ बसीठी बीरबर जेहि बिधि बालिकुमार॥६७ (क)॥

भावार्थ: पुल बाँधकर जिस प्रकार वानरोंकी सेना समुद्रके पार उतरी और जिस प्रकार वीरश्रेष्ठ बालिपुत्र अंगद दूत बनकर गये, वह सब कहा॥ ६७ ( क )॥

**दो०** 
> निसिचर कीस लराई बरनिसि बिबिधि प्रकार।  
> कुंभकरन घननाद कर बल पौरुष संघार॥६७ (ख)॥

भावार्थ: फिर राक्षसों और वानरोंके युद्धका अनेकों प्रकारसे वर्णन किया। फिर कुम्भकर्ण और मेघनादके बल, पुरुषार्थ और संहारकी कथा कही॥ ६७ ( ख )॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/uttar-kand/doha-66b  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/uttar-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/uttar-kand/doha-68b

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
