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title: "उत्तरकाण्ड दोहा 28"
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# उत्तरकाण्ड · दोहा 28

**चौ०** 
> सुमन बाटिका सबहिं लगाईं। बिबिध भाँति करि जतन बनाईं॥  
> लता ललित बहु जाति सुहाईं। फूलहिं सदा बसंत कि नाईं॥१॥

भावार्थ: सभी लोगोंने भिन्न-भिन्न प्रकारकी पुष्पोंकी वाटिकाएँ यत्न करके लगा रखी हैं, जिनमें बहुत जातियोंकी सुन्दर और ललित लताएँ सदा वसंतकी तरह फूलती रहती हैं॥ १ ॥

**चौ०** 
> गुंजत मधुकर मुखर मनोहर। मारुत त्रिबिधि सदा बह सुंदर॥  
> नाना खग बालकन्हि जिआए। बोलत मधुर उड़ात सुहाए॥२॥

भावार्थ: भौंरे मनोहर स्वरसे गुंजार करते हैं। सदा तीनों प्रकारकी सुन्दर वायु बहती रहती है। बालकोंने बहुत-से पक्षी पाल रखे हैं, जो मधुर बोली बोलते हैं और उड़नेमें सुन्दर लगते हैं॥ २ ॥

**चौ०** 
> मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत॥  
> जहँ तहँ देखहिं निज परिछाहीं। बहु बिधि कूजहिं नृत्य कराहीं॥३॥

भावार्थ: मोर, हंस, सारस और कबूतर घरोंके ऊपर बड़ी ही शोभा पाते हैं। वे पक्षी [ मणियोंकी दीवारोंमें और छतमें ] जहाँ-तहाँ अपनी परछाईं देखकर [ वहाँ दूसरे पक्षी समझकर ] बहुत प्रकारसे मधुर बोली बोलते और नृत्य करते हैं॥ ३ ॥

**चौ०** 
> सुक सारिका पढ़ावहिं बालक। कहहु राम रघुपति जनपालक॥  
> राज दुआर सकल बिधि चारू। बीथीं चौहट रुचिर बजारू॥४॥

भावार्थ: बालक तोता-मैनाको पढ़ाते हैं कि कहो—‘राम’ ‘रघुपति’ ‘जनपालक’। राजद्वार सब प्रकारसे सुन्दर है। गलियाँ, चौराहे और बाजार सभी सुन्दर हैं॥ ४ ॥

**छं०** 
> बाजार रुचिर न बनइ बरनत बस्तु बिनु गथ पाइए।  
> जहँ भूप रमानिवास तहँ की संपदा किमि गाइए॥  
> बैठे बजाज सराफ बनिक अनेक मनहुँ कुबेर ते।  
> सब सुखी सब सच्चरित सुंदर नारि नर सिसु जरठ जे॥

भावार्थ: सुन्दर बाजार है, जो वर्णन करते नहीं बनता; वहाँ वस्तुएँ बिना ही मूल्य मिलती हैं। जहाँ स्वयं लक्ष्मीपति राजा हों, वहाँकी सम्पत्तिका वर्णन कैसे किया जाय? बजाज ( कपड़ेका व्यापार करनेवाले ), सराफ ( रुपये-पैसेका लेन-देन करनेवाले ) आदि वणिक्‌ ( व्यापारी ) बैठे हुए ऐसे जान पड़ते हैं मानो अनेक कुबेर हों। स्त्री, पुरुष, बच्चे और बूढ़े जो भी हैं, सभी सुखी, सदाचारी और सुन्दर हैं।

**दो०** 
> उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर।  
> बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर॥२८॥

भावार्थ: नगरके उत्तर दिशामें सरयूजी बह रही हैं, जिनका जल निर्मल और गहरा है। मनोहर घाट बँधे हुए हैं, किनारेपर जरा भी कीचड़ नहीं है॥ २८ ॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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