---
title: "सुन्दरकाण्ड दोहा 39b"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/sunderkand/doha-39b"
lang: "hi"
---

# सुन्दरकाण्ड · दोहा 39b

**चौ०** 
> तात राम नहिं नर भूपाला। भुवनेस्वर कालहु कर काला॥  
> ब्रह्म अनामय अज भगवंता। ब्यापक अजित अनादि अनंता॥१॥

भावार्थ: हे तात! राम मनुष्योंके ही राजा नहीं हैं। वे समस्त लोकोंके स्वामी और कालके भी काल हैं। वे [ सम्पूर्ण ऐश्वर्य, यश, श्री, धर्म, वैराग्य एवं ज्ञानके भण्डार ] भगवान्‌ हैं; वे निरामय ( विकाररहित ), अजन्मा, व्यापक, अजेय, अनादि और अनन्त ब्रह्म हैं॥१॥

**चौ०** 
> गो द्विज धेनु देव हितकारी। कृपा सिंधु मानुष तनुधारी॥  
> जन रंजन भंजन खल ब्राता। बेद धर्म रच्छक सुनु भ्राता॥२॥

भावार्थ: उन कृपाके समुद्र भगवान्‌ने पृथ्वी, ब्राह्मण, गौ और देवताओंका हित करनेके लिये ही मनुष्य-शरीर धारण किया है। हे भाई! सुनिये, वे सेवकोंको आनन्द देनेवाले, दुष्टोंके समूहका नाश करनेवाले और वेद तथा धर्मकी रक्षा करनेवाले हैं॥२॥

**चौ०** 
> ताहि बयरु तजि नाइअ माथा। प्रनतारति भंजन रघुनाथा॥  
> देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही। भजहु राम बिनु हेतु सनेही॥३॥

भावार्थ: वैर त्यागकर उन्हें मस्तक नवाइये। वे श्रीरघुनाथजी शरणागतका दुःख नाश करनेवाले हैं। हे नाथ! उन प्रभु ( सर्वेश्वर ) को जानकीजी दे दीजिये और बिना ही कारण स्नेह करनेवाले श्रीरामजीको भजिये॥३॥

**चौ०** 
> सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा। बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा॥  
> जासु नाम त्रय ताप नसावन। सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन॥४॥

भावार्थ: जिसे सम्पूर्ण जगत्‌से द्रोह करनेका पाप लगा है, शरण जानेपर प्रभु उसका भी त्याग नहीं करते। जिनका नाम तीनों तापोंका नाश करनेवाला है, वे ही प्रभु ( भगवान्‌ ) मनुष्यरूपमें प्रकट हुए हैं। हे रावण! हृदयमें यह समझ लीजिये॥४॥

**दो०** 
> बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस।  
> परिहरि मान मोह मद भजहु कोसलाधीस॥३९ (क)॥

भावार्थ: हे दशशीश! मैं बार-बार आपके चरणों लगता हूँ और विनती करता हूँ कि मान, मोह और मदको त्यागकर आप कोसलपति श्रीरामजीका भजन कीजिये॥३९ ( क )॥

**दो०** 
> मुनि पुलस्ति निज सिष्य सन कहि पठई यह बात।  
> तुरत सो मैं प्रभु सन कही पाइ सुअवसरु तात॥३९ (ख)॥

भावार्थ: मुनि पुलस्त्यजीने अपने शिष्यके हाथ यह बात कहला भेजी है। हे तात! सुन्दर अवसर पाकर मैंने तुरंत ही वह बात प्रभु ( आप ) से कह दी॥३९ ( ख )॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/sunderkand/doha-38  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/sunderkand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/sunderkand/doha-40

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
