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title: "लंकाकाण्ड दोहा 85"
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# लंकाकाण्ड · दोहा 85

**चौ०** 
> इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई॥  
> नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा॥१॥

भावार्थ: यहाँ विभीषणजीने सब खबर पायी और तुरंत जाकर श्रीरघुनाथजीको कह सुनायी कि हे नाथ! रावण एक यज्ञ कर रहा है। उसके सिद्ध होनेपर वह अभागा सहज ही नहीं मरेगा॥१॥

**चौ०** 
> पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर॥  
> प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए॥२॥

भावार्थ: हे नाथ! तुरंत वानर योद्धाओंको भेजिये; जो यज्ञका विध्वंस करें, जिससे रावण युद्धमें आवे। प्रातःकाल होते ही प्रभुने वीर योद्धाओंको भेजा। हनुमान्‌ और अंगद आदि सब [ प्रधान वीर ] दौड़े॥२॥

**चौ०** 
> कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका॥  
> जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा॥३॥

भावार्थ: वानर खेलसे ही कूदकर लंकापर जा चढ़े और निर्भय रावणके महलमें जा घुसे। ज्यों ही उसको यज्ञ करते देखा, त्यों ही सब वानरोंको बहुत क्रोध हुआ॥३॥

**चौ०** 
> रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा॥  
> अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता॥४॥

भावार्थ: [ उन्होंने कहा— ] अरे ओ निर्लज्ज! रणभूमिसे घर भाग आया और यहाँ आकर बगुलेका-सा ध्यान लगाकर बैठा है? ऐसा कहकर अंगदने लात मारी। पर उसने इनकी ओर देखा भी नहीं, उस दुष्टका मन स्वार्थमें अनुरक्त था॥४॥

**छं०** 
> नहिं चितव जब करि कोप कपि गहि दसन लातन्ह मारहीं।  
> धरि केस नारि निकारि बाहेर तेऽतिदीन पुकारहीं॥  
> तब उठेउ क्रुद्ध कृतांत सम गहि चरन बानर डारई।  
> एहि बीच कपिन्ह बिधंस कृत मख देखि मन महुँ हारई॥

भावार्थ: जब उसने नहीं देखा, तब वानर क्रोध करके उसे दाँतोंसे पकड़कर [ काटने और ] लातोंसे मारने लगे। स्त्रियोंको बाल पकड़कर घरसे बाहर घसीट लाये, वे अत्यन्त ही दीन होकर पुकारने लगीं। तब रावण कालके समान क्रोधित होकर उठा और वानरोंको पैर पकड़कर पटकने लगा। इसी बीचमें वानरोंने यज्ञ विध्वंस कर डाला, यह देखकर वह मनमें हारने लगा ( निराश होने लगा )।

**दो०** 
> जग्य बिधंसि कुसल कपि आए रघुपति पास।  
> चलेउ निसाचर क्रुद्ध होइ त्यागि जिवन कै आस॥८५॥

भावार्थ: यज्ञ विध्वंस करके सब चतुर वानर रघुनाथजीके पास आ गये। तब रावण जीनेकी आशा छोड़कर क्रोधित होकर चला॥८५॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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