---
title: "किष्किन्धाकाण्ड दोहा 22"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/kishkindha-kand/doha-22"
lang: "hi"
---

# किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 22

**चौ०** 
> बानर कटक उमा मैं देखा। सो मूरुख जो करन चह लेखा॥  
> आइ राम पद नावहिं माथा। निरखि बदनु सब होहिं सनाथा॥१॥

भावार्थ: [ शिवजी कहते हैं— ] हे उमा! वानरोंकी वह सेना मैंने देखी थी। उसकी जो गिनती करना चाहे वह महान् मूर्ख है। सब वानर आ-आकर श्रीरामजीके चरणोंमें मस्तक नवाते हैं और [ सौन्दर्य-माधुर्यनिधि ] श्रीमुखके दर्शन करके कृतार्थ होते हैं॥ १ ॥

**चौ०** 
> अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं॥  
> यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई। बिस्वरूप ब्यापक रघुराई॥२॥

भावार्थ: सेनामें एक भी वानर ऐसा नहीं था जिससे श्रीरामजीने कुशल न पूछी हो। प्रभुके लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है; क्योंकि श्रीरघुनाथजी विश्वरूप तथा सर्वव्यापक हैं ( सारे रूपों और सब स्थानोंमें हैं )॥ २ ॥

**चौ०** 
> ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई। कह सुग्रीव सबहि समुझाई॥  
> राम काजु अरु मोर निहोरा। बानर जूथ जाहु चहुँ ओरा॥३॥

भावार्थ: आज्ञा पाकर सब जहाँ-तहाँ खड़े हो गये। तब सुग्रीवने सबको समझाकर कहा कि हे वानरोंके समूहो! यह श्रीरामचन्द्रजीका कार्य है और मेरा निहोरा ( अनुरोध ) है; तुम चारों ओर जाओ॥ ३ ॥

**चौ०** 
> जनकसुता कहुँ खोजहु जाई। मास दिवस महँ आएहु भाई॥  
> अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाएँ। आवइ बनिहि सो मोहि मराएँ॥४॥

भावार्थ: और जाकर जानकीजीको खोजो। हे भाई! महीनेभरमें वापस आ जाना। जो [ महीनेभरकी ] अवधि बिताकर बिना पता लगाये ही लौट आवेगा उसे मेरे द्वारा मरवाते ही बनेगा ( अर्थात् मुझे उसका वध करवाना ही पड़ेगा )॥ ४ ॥

**दो०** 
> बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत।  
> तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत॥२२॥

भावार्थ: सुग्रीवके वचन सुनते ही सब वानर तुरंत जहाँ-तहाँ ( भिन्न-भिन्न दिशाओंमें ) चल दिये। तब सुग्रीवने अंगद, नल, हनुमान् आदि प्रधान-प्रधान योद्धाओंको बुलाया [ और कहा— ]॥ २२ ॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/kishkindha-kand/doha-21  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/kishkindha-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/kishkindha-kand/doha-23

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
