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title: "किष्किन्धाकाण्ड दोहा 2"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/kishkindha-kand/doha-2"
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# किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 2

**चौ०** 
> कोसलेस दसरथ के जाए। हम पितु बचन मानि बन आए॥  
> नाम राम लछिमन दोउ भाई। संग नारि सुकुमारि सुहाई॥१॥

भावार्थ: [ श्रीरामचन्द्रजीने कहा— ] हम कोसलराज दशरथजीके पुत्र हैं और पिताका वचन मानकर वन आये हैं। हमारे राम-लक्ष्मण नाम हैं, हम दोनों भाई हैं। हमारे साथ सुन्दर सुकुमारी स्त्री थी॥ १ ॥

**चौ०** 
> इहाँ हरी निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही॥  
> आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई॥२॥

भावार्थ: यहाँ (वनमें) राक्षसने [ मेरी पत्नी ] जानकीको हर लिया। हे ब्राह्मण! हम उसे ही खोजते फिरते हैं। हमने तो अपना चरित्र कह सुनाया। अब हे ब्राह्मण! अपनी कथा समझाकर कहिये॥ २ ॥

**चौ०** 
> प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। सो सुख उमा जाइ नहिं बरना॥  
> पुलकित तन मुख आव न बचना। देखत रुचिर बेष कै रचना॥३॥

भावार्थ: प्रभुको पहचानकर हनुमान्‌जी उनके चरण पकड़कर पृथ्वीपर गिर पड़े ( उन्होंने साष्टाङ्ग दण्डवत्-प्रणाम किया )। [ शिवजी कहते हैं— ] हे पार्वती! वह सुख वर्णन नहीं किया जा सकता। शरीर पुलकित है, मुखसे वचन नहीं निकलता। वे प्रभुके सुन्दर वेषकी रचना देख रहे हैं!॥ ३ ॥

**चौ०** 
> पुनि धीरजु धरि अस्तुति कीन्ही। हरष हृदयँ निज नाथहि चीन्ही॥  
> मोर न्याउ मैं पूछा साईं। तुम्ह पूछहु कस नर की नाईं॥४॥

भावार्थ: फिर धीरज धरकर स्तुति की। अपने नाथको पहचान लेनेसे हृदयमें हर्ष हो रहा है। [ फिर हनुमान्‌जीने कहा— ] हे स्वामी! मैंने जो पूछा वह मेरा पूछना तो न्याय था, [ वर्षोंके बाद आपको देखा, वह भी तपस्वीके वेषमें और मेरी वानरी-बुद्धि, इससे मैं तो आपको पहचान न सका और अपनी परिस्थितिके अनुसार मैंने आपसे पूछा ] परन्तु आप मनुष्यकी तरह कैसे पूछ रहे हैं ?॥ ४ ॥

**चौ०** 
> तव माया बस फिरउँ भुलाना। ता ते मैं नहिं प्रभु पहिचाना॥५॥

भावार्थ: मैं तो आपकी मायाके वश भूला फिरता हूँ; इसीसे मैंने अपने स्वामी (आप) को नहीं पहचाना॥ ५ ॥

**दो०** 
> एकु मैं मंद मोहबस कुटिल हृदय अग्यान।  
> पुनि प्रभु मोहि बिसारेउ दीनबंधु भगवान॥२॥

भावार्थ: एक तो मैं यों ही मन्द हूँ, दूसरे मोहके वशमें हूँ, तीसरे हृदयका कुटिल और अज्ञान हूँ, फिर हे दीनबन्धु भगवान्‌! प्रभु (आप) ने भी मुझे भुला दिया!॥ २ ॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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