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title: "बालकाण्ड दोहा 98"
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# बालकाण्ड · दोहा 98

**चौ०** 
> तब नारद सबही समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा॥  
> मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी॥१॥

भावार्थ: तब नारदजीने पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर सबको समझाया [ और कहा ] कि हे मैना! तुम मेरी सच्ची बात सुनो, तुम्हारी यह लड़की साक्षात्‌ जगज्जननी भवानी है॥१॥

**चौ०** 
> अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि॥  
> जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि॥२॥

भावार्थ: ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजीके अर्द्धाङ्गमें रहती हैं। ये जगत्‌की उत्पत्ति, पालन और संहार करनेवाली हैं; और अपनी इच्छासे ही लीला-शरीर धारण करती हैं॥२॥

**चौ०** 
> जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई॥  
> तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं॥३॥

भावार्थ: पहले ये दक्षके घर जाकर जन्मी थीं, तब इनका सती नाम था, बहुत सुन्दर शरीर पाया था। वहाँ भी सती शङ्करजीसे ही ब्याही गयी थीं। यह कथा सारे जगत्‌में प्रसिद्ध है॥३॥

**चौ०** 
> एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा॥  
> भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा॥४॥

भावार्थ: एक बार इन्होंने शिवजीके साथ आते हुए [ राहमें ] रघुकुलरूपी कमलके सूर्य श्रीरामचन्द्रजीको देखा, तब इन्हें मोह हो गया और इन्होंने शिवजीका कहना न मानकर भ्रमवश सीताजीका वेष धारण कर लिया॥४॥

**छं०** 
> सिय बेषु सतीं जो कीन्ह तेहिं अपराध संकर परिहरीं।  
> हर बिरहँ जाइ बहोरि पितु कें जग्य जोगानल जरीं॥  
> अब जनमि तुम्हरे भवन निज पति लागि दारुन तपु किया।  
> अस जानि संसय तजहु गिरिजा सर्बदा संकरप्रिया॥

भावार्थ: सतीजीने जो सीताका वेष धारण किया, उसी अपराधके कारण शङ्करजीने उनको त्याग दिया। फिर शिवजीके वियोगमें ये अपने पिताके यज्ञमें जाकर वहीं योगाग्निसे भस्म हो गयीं। अब इन्होंने तुम्हारे घर जन्म लेकर अपने पतिके लिये कठिन तप किया है ऐसा जानकर सन्देह छोड़ दो, पार्वतीजी तो सदा ही शिवजीकी प्रिया ( अर्द्धाङ्गिनी ) हैं।

**दो०** 
> सुनि नारद के बचन तब सब कर मिटा बिषाद।  
> छन महुँ ब्यापेउ सकल पुर घर घर यह संबाद॥९८॥

भावार्थ: तब नारदके वचन सुनकर सबका विषाद मिट गया और क्षणभरमें यह समाचार सारे नगरमें घर-घर फैल गया॥९८॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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