---
title: "बालकाण्ड दोहा 21"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-21"
lang: "hi"
---

# बालकाण्ड · दोहा 21

**चौ०** 
> समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी॥  
> नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी॥१॥

भावार्थ: समझनेमें नाम और नामी दोनों एक-से हैं, किन्तु दोनोंमें परस्पर स्वामी और सेवकके समान प्रीति है ( अर्थात्‌ नाम और नामीमें पूर्ण एकता होनेपर भी जैसे स्वामीके पीछे सेवक चलता है, उसी प्रकार नामके पीछे नामी चलते हैं। प्रभु श्रीरामजी अपने ‘राम’ नामका ही अनुगमन करते हैं, नाम लेते ही वहाँ आ जाते हैं )। नाम और रूप दोनों ईश्वरकी उपाधि हैं; ये ( भगवान्‌के नाम और रूप ) दोनों अनिर्वचनीय हैं, अनादि हैं और सुन्दर ( शुद्ध भक्तियुक्त ) बुद्धिसे ही इनका [ दिव्य अविनाशी ] स्वरूप जाननेमें आता है॥१॥

**चौ०** 
> को बड़ छोट कहत अपराधू। सुनि गुन भेदु समुझिहहिं साधू॥  
> देखिअहिं रूप नाम आधीना। रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना॥२॥

भावार्थ: इन ( नाम और रूप ) में कौन बड़ा है, कौन छोटा, यह कहना तो अपराध है। इनके गुणोंका तारतम्य ( कमी-बेशी ) सुनकर साधु पुरुष स्वयं ही समझ लेंगे। रूप नामके अधीन देखे जाते हैं, नामके बिना रूपका ज्ञान नहीं हो सकता॥२॥

**चौ०** 
> रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें॥  
> सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें॥३॥

भावार्थ: कोई-सा विशेष रूप बिना उसका नाम जाने हथेलीपर रखा हुआ भी पहचाना नहीं जा सकता और रूपके बिना देखे भी नामका स्मरण किया जाय तो विशेष प्रेमके साथ वह रूप हृदयमें आ जाता है॥३॥

**चौ०** 
> नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी॥  
> अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी॥४॥

भावार्थ: नाम और रूपकी गतिकी कहानी ( विशेषताकी कथा ) अकथनीय है। वह समझनेमें सुखदायक है, परन्तु उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। निर्गुण और सगुणके बीचमें नाम सुन्दर साक्षी है और दोनोंका यथार्थ ज्ञान करानेवाला चतुर दुभाषिया है॥४॥

**दो०** 
> राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।  
> तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर॥२१॥

भावार्थ: तुलसीदासजी कहते हैं, यदि तू भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहता है तो मुखरूपी द्वारकी जीभरूपी देहलीपर रामनामरूपी मणि-दीपकको रख॥२१॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-20  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-22

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
