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title: "बालकाण्ड दोहा 190"
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# बालकाण्ड · दोहा 190

श्रीभगवान्‌का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द

**चौ०** 
> तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं। कौसल्यादि तहाँ चलि आईं॥  
> अर्ध भाग कौसल्यहि दीन्हा। उभय भाग आधे कर कीन्हा॥१॥

भावार्थ: उसी समय राजाने अपनी प्यारी पत्नियोंको बुलाया। कौसल्या आदि सब [ रानियाँ ] वहाँ चली आयीं। राजाने [ पायसका ] आधा भाग कौसल्याको दिया, [ और शेष ] आधेके दो भाग किये॥ १ ॥

**चौ०** 
> कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ॥  
> कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि॥२॥

भावार्थ: वह ( उनमेंसे एक भाग ) राजाने कैकेयीको दिया। शेष जो बच रहा उसके फिर दो भाग हुए और राजाने उनको कौसल्या और कैकेयीके हाथपर रखकर ( अर्थात्‌ उनकी अनुमति लेकर ) और इस प्रकार उनका मन प्रसन्न करके सुमित्राको दिया॥ २ ॥

**चौ०** 
> एहि बिधि गर्भसहित सब नारी। भईं हृदयँ हरषित सुख भारी॥  
> जा दिन तें हरि गर्भहिं आए। सकल लोक सुख संपति छाए॥३॥

भावार्थ: इस प्रकार सब स्त्रियाँ गर्भवती हुईं। वे हृदयमें बहुत हर्षित हुईं। उन्हें बड़ा सुख मिला। जिस दिनसे श्रीहरि [ लीलासे ही ] गर्भमें आये, सब लोकोंमें सुख और सम्पत्ति छा गयी॥ ३ ॥

**चौ०** 
> मंदिर महँ सब राजहिं रानीं। सोभा सील तेज की खानीं॥  
> सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ॥४॥

भावार्थ: शोभा, शील और तेजकी खान [ बनी हुई ] सब रानियाँ महलमें सुशोभित हुईं। इस प्रकार कुछ समय सुखपूर्वक बीता और वह अवसर आ गया जिसमें प्रभुको प्रकट होना था॥ ४ ॥

**दो०** 
> जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।  
> चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥१९०॥

भावार्थ: योग, लग्न, ग्रह, वार और तिथि सभी अनुकूल हो गये। जड और चेतन सब हर्षसे भर गये। [ क्योंकि ] श्रीरामका जन्म सुखका मूल है॥ १९० ॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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