---
title: "बालकाण्ड दोहा 140"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-140"
lang: "hi"
---

# बालकाण्ड · दोहा 140

मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान

**चौ०** 
> एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे॥  
> कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं॥१॥

भावार्थ: इस प्रकार भगवान्‌के अनेकों सुन्दर, सुखदायक और अलौकिक जन्म और कर्म हैं। प्रत्येक कल्पमें जब-जब भगवान्‌ अवतार लेते हैं और नाना प्रकारकी सुन्दर लीलाएँ करते हैं,॥१॥

**चौ०** 
> तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई॥  
> बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने॥२॥

भावार्थ: तब-तब मुनीश्वरोंने परम पवित्र काव्यरचना करके उनकी कथाओंका गान किया है और भाँति-भाँतिके अनुपम प्रसंगोंका वर्णन किया है, जिनको सुनकर समझदार ( विवेकी ) लोग आश्चर्य नहीं करते॥२॥

**चौ०** 
> हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥  
> रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥३॥

भावार्थ: श्रीहरि अनन्त हैं ( उनका कोई पार नहीं पा सकता ) और उनकी कथा भी अनन्त है; सब संतलोग उसे बहुत प्रकारसे कहते-सुनते हैं। श्रीरामचन्द्रजीके सुन्दर चरित्र करोड़ कल्पोंमें भी गाये नहीं जा सकते॥३॥

**चौ०** 
> यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी॥  
> प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी। सेवत सुलभ सकल दुखहारी॥४॥

भावार्थ: [ शिवजी कहते हैं कि ] हे पार्वती! मैंने यह बतलानेके लिये इस प्रसंगको कहा कि ज्ञानी मुनि भी भगवान्‌की मायासे मोहित हो जाते हैं। प्रभु कौतुकी ( लीलामय ) हैं और शरणागतका हित करनेवाले हैं। वे सेवा करनेमें बहुत सुलभ और सब दुःखोंके हरनेवाले हैं॥४॥

**सो०** 
> सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।  
> अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि॥१४०॥

भावार्थ: देवता, मनुष्य और मुनियोंमें ऐसा कोई नहीं है जिसे भगवान्‌की महान्‌ बलवती माया मोहित न कर दे। मनमें ऐसा विचारकर उस महामायाके स्वामी ( प्रेरक ) श्रीभगवान्‌का भजन करना चाहिये॥१४०॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-139  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-141

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
