---
title: "बालकाण्ड दोहा 134"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-134"
lang: "hi"
---

# बालकाण्ड · दोहा 134

**चौ०** 
> जेहिं समाज बैठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई॥  
> तहँ बैठे महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ॥ १ ॥

भावार्थ: नारदजी अपने हृदयमें रूपका बड़ा अभिमान लेकर जिस समाज (पंक्ति) में जाकर बैठे थे, ये शिवजीके दोनों गण भी वहीं बैठ गये। ब्राह्मणके वेषमें होनेके कारण उनकी इस चालको कोई न जान सका॥१॥

**चौ०** 
> करहिं कूटि नारदहि सुनाई। नीकि दीन्हि हरि सुंदरताई॥  
> रीझिहि राजकुअँरि छबि देखी। इन्हहि बरिहि हरि जानि बिसेषी॥२॥

भावार्थ: वे नारदजीको सुना-सुनाकर व्यंग्य वचन कहते थे—भगवान्‌ने इनको अच्छी ‘सुन्दरता’ दी है। इनकी शोभा देखकर राजकुमारी रीझ ही जायगी और ‘हरि’ (वानर) जानकर इन्हींको खास तौरसे वरेगी॥२॥

**चौ०** 
> मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ॥  
> जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी॥३॥

भावार्थ: नारद मुनिको मोह हो रहा था, क्योंकि उनका मन दूसरेके हाथ (मायाके वश) में था। शिवजीके गण बहुत प्रसन्न होकर हँस रहे थे। यद्यपि मुनि उनकी अटपटी बातें सुन रहे थे, पर बुद्धि भ्रममें सनी हुई होनेके कारण वे बातें उनकी समझमें नहीं आती थीं (उनकी बातोंको वे अपनी प्रशंसा समझ रहे थे)॥३॥

**चौ०** 
> काहुँ न लखा सो चरित बिसेषा। सो सरूप नृपकन्याँ देखा॥  
> मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदयँ क्रोध भा तेही॥४॥

भावार्थ: इस विशेष चरितको और किसीने नहीं जाना, केवल राजकन्याने [नारदजीका] वह रूप देखा। उनका बन्दरका-सा मुँह और भयंकर शरीर देखते ही कन्याके हृदयमें क्रोध उत्पन्न हो गया॥४॥

**दो०** 
> सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।  
> देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल॥१३४॥

भावार्थ: तब राजकुमारी सखियोंको साथ लेकर इस तरह चली मानो राजहंसिनी चल रही है। वह अपने कमल-जैसे हाथोंमें जयमाला लिये सब राजाओंको देखती हुई घूमने लगी॥१३४॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-133  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/bal-kand/doha-135

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
