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title: "बालकाण्ड दोहा 11"
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# बालकाण्ड · दोहा 11

**चौ०** 
> मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी॥  
> नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई॥१॥

भावार्थ: मणि, माणिक और मोतीकी जैसी सुन्दर छबि है, वह साँप, पर्वत और हाथीके मस्तकपर वैसी शोभा नहीं पाती। राजाके मुकुट और नवयुवती स्त्रीके शरीरको पाकर ही ये सब अधिक शोभाको प्राप्त होते हैं॥ १ ॥

**चौ०** 
> तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं॥  
> भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई॥२॥

भावार्थ: इसी तरह, बुद्धिमान् लोग कहते हैं कि सुकविकी कविता भी उत्पन्न और कहीं होती है और शोभा अन्यत्र कहीं पाती है ( अर्थात् कविकी वाणीसे उत्पन्न हुई कविता वहाँ शोभा पाती है जहाँ उसका विचार, प्रचार तथा उसमें कथित आदर्शका ग्रहण और अनुसरण होता है )। कविके स्मरण करते ही उसकी भक्तिके कारण सरस्वतीजी ब्रह्मलोकको छोड़कर दौड़ी आती हैं॥ २ ॥

**चौ०** 
> राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ॥  
> कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी॥३॥

भावार्थ: सरस्वतीजीकी दौड़ी आनेकी वह थकावट रामचरितरूपी सरोवरमें उन्हें नहलाये बिना दूसरे करोड़ों उपायोंसे भी दूर नहीं होती। कवि और पण्डित अपने हृदयमें ऐसा विचारकर कलियुगके पापोंको हरनेवाले श्रीहरिके यशका ही गान करते हैं॥ ३ ॥

**चौ०** 
> कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना। सिर धुनि गिरा लगत पछिताना॥  
> हृदय सिंधु मति सीप समाना। स्वाति सारदा कहहिं सुजाना॥४॥

भावार्थ: संसारी मनुष्योंका गुणगान करनेसे सरस्वतीजी सिर धुनकर पछताने लगती हैं [ कि मैं क्यों इसके बुलानेपर आयी ]। बुद्धिमान् लोग हृदयको समुद्र, बुद्धिको सीप और सरस्वतीको स्वाति नक्षत्रके समान कहते हैं॥ ४॥

**चौ०** 
> जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू॥५॥

भावार्थ: इसमें यदि श्रेष्ठ विचाररूपी जल बरसता है तो मुक्तामणिके समान सुन्दर कविता होती है॥ ५ ॥

**दो०** 
> जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।  
> पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग॥११॥

भावार्थ: उन कवितारूपी मुक्तामणियोंको युक्तिसे बेधकर फिर रामचरित्ररूपी सुन्दर तागेमें पिरोकर सज्जन लोग अपने निर्मल हृदयमें धारण करते हैं, जिससे अत्यन्त अनुरागरूपी शोभा होती है ( वे आत्यन्तिक प्रेमको प्राप्त होते हैं )॥११॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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