---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 78"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-78"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 78

**चौ०** 
> रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी॥  
> लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने॥१॥

भावार्थ: राजाने इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजीको रखनेके लिये छल छोड़कर बहुत-से उपाय किये। पर जब उन्होंने धर्मधुरन्धर, धीर और बुद्धिमान्‌ श्रीरामजीका रुख देख लिया और वे रहते हुए न जान पड़े,॥ १ ॥

**चौ०** 
> तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही॥  
> कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए॥२॥

भावार्थ: तब राजाने सीताजीको हृदयसे लगा लिया और बड़े प्रेमसे बहुत प्रकारकी शिक्षा दी। वनके दुःसह दुःख कहकर सुनाये। फिर सास, ससुर तथा पिताके [ पास रहनेके ] सुखोंको समझाया॥ २ ॥

**चौ०** 
> सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा॥  
> औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई॥३॥

भावार्थ: परन्तु सीताजीका मन श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें अनुरक्त था। इसलिये उन्हें घर अच्छा नहीं लगा और न वन भयानक लगा। फिर और सब लोगोंने भी वनमें विपत्तियोंकी अधिकता बता-बताकर सीताजीको समझाया॥ ३ ॥

**चौ०** 
> सचिव नारि गुर नारि सयानी। सहित सनेह कहहिं मृदु बानी॥  
> तुम्ह कहुँ तौ न दीन्ह बनबासू। करहु जो कहहिं ससुर गुर सासू॥४॥

भावार्थ: मन्त्री सुमन्त्रजीकी पत्नी और गुरु वसिष्ठजीकी स्त्री अरुन्धतीजी तथा और भी चतुर स्त्रियाँ स्नेहके साथ कोमल वाणीसे कहती हैं कि तुमको तो [ राजाने ] वनवास दिया नहीं है। इसलिये जो ससुर, गुरु और सास कहें, तुम तो वही करो॥ ४ ॥

**दो०** 
> सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।  
> सरद चंद चंदिनि लगत जनु चकई अकुलानि॥७८॥

भावार्थ: यह शीतल, हितकारी, मधुर और कोमल सीख सुननेपर सीताजीको अच्छी नहीं लगी। [ वे इस प्रकार व्याकुल हो गयीं ] मानो शरद्-ऋतुके चन्द्रमाकी चाँदनी लगते ही चकई व्याकुल हो उठी हो॥७८॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-77  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-79

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
