---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 6"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-6"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 6

**चौ०** 
> हरषि मुनीस कहेउ मृदु बानी। आनहु सकल सुतीरथ पानी॥  
> औषध मूल फूल फल पाना। कहे नाम गनि मंगल नाना॥१॥

भावार्थ: मुनिराजने हर्षित होकर कोमल वाणीसे कहा कि सम्पूर्ण श्रेष्ठ तीर्थोंका जल ले आओ। फिर उन्होंने ओषधि, मूल, फूल, फल और पत्र आदि अनेकों माङ्गलिक वस्तुओंके नाम गिनकर बताये॥ १ ॥

**चौ०** 
> चामर चरम बसन बहु भाँती। रोम पाट पट अगनित जाती॥  
> मनिगन मंगल बस्तु अनेका। जो जग जोगु भूप अभिषेका॥२॥

भावार्थ: चँवर, मृगचर्म, बहुत प्रकारके वस्त्र, असंख्यों जातियोंके ऊनी और रेशमी कपड़े, [ नाना प्रकारकी ] मणियाँ ( रत्न ) तथा और भी बहुत-सी मङ्गल वस्तुएँ, जो जगत्‌में राज्याभिषेकके योग्य होती हैं [ सबको मँगानेकी उन्होंने आज्ञा दी ]॥ २ ॥

**चौ०** 
> बेद बिदित कहि सकल बिधाना। कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना॥  
> सफल रसाल पूगफल केरा। रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा॥३॥

भावार्थ: मुनिने वेदोंमें कहा हुआ सब विधान बताकर कहा—नगरमें बहुत-से मण्डप ( चँदोवे ) सजाओ। फलोंसमेत आम, सुपारी और केलेके वृक्ष नगरकी गलियोंमें चारों ओर रोप दो॥ ३ ॥

**चौ०** 
> रचहु मंजु मनि चौकें चारू। कहहु बनावन बेगि बजारू॥  
> पूजहु गनपति गुर कुलदेवा। सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा॥४॥

भावार्थ: सुन्दर मणियोंके मनोहर चौक पुरवाओ और बाजारको तुरंत सजानेके लिये कह दो। श्रीगणेशजी, गुरु और कुलदेवताकी पूजा करो और भूदेव ब्राह्मणोंकी सब प्रकारसे सेवा करो॥ ४ ॥

**दो०** 
> ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।  
> सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग॥६॥

भावार्थ: ध्वजा, पताका, तोरण, कलश, घोड़े, रथ और हाथी सबको सजाओ। मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजीके वचनोंको शिरोधार्य करके सब लोग अपने-अपने काममें लग गये॥ ६ ॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-5  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-7

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
