---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 58"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-58"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 58

**चौ०** 
> दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी॥  
> बैठि नमितमुख सोचति सीता। रूप रासि पति प्रेम पुनीता॥१॥

भावार्थ: सासने कोमल वाणीसे आशीर्वाद दिया। वे सीताजीको अत्यन्त सुकुमारी देखकर व्याकुल हो उठीं। रूपकी राशि और पतिके साथ पवित्र प्रेम करनेवाली सीताजी नीचा मुख किये बैठी सोच रही हैं॥ १ ॥

**चौ०** 
> चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू॥  
> की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना॥२॥

भावार्थ: जीवननाथ ( प्राणनाथ ) वनको चलना चाहते हैं। देखें किस पुण्यवान्‌से उनका साथ होगा—शरीर और प्राण दोनों साथ जायँगे या केवल प्राणहीसे इनका साथ होगा ? विधाताकी करनी कुछ जानी नहीं जाती॥ २ ॥

**चौ०** 
> चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी॥  
> मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं। हमहि सीय पद जनि परिहरहीं॥३॥

भावार्थ: सीताजी अपने सुन्दर चरणोंके नखोंसे धरती कुरेद रही हैं। ऐसा करते समय नूपुरोंका जो मधुर शब्द हो रहा है, कवि उसका इस प्रकार वर्णन करते हैं कि मानो प्रेमके वश होकर नूपुर यह विनती कर रहे हैं कि सीताजीके चरण कभी हमारा त्याग न करें॥ ३ ॥

**चौ०** 
> मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी॥  
> तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सासु ससुर परिजनहि पिआरी॥४॥

भावार्थ: सीताजी सुन्दर नेत्रोंसे जल बहा रही हैं। उनकी यह दशा देखकर श्रीरामजीकी माता कौसल्याजी बोलीं—हे तात! सुनो, सीता अत्यन्त ही सुकुमारी हैं तथा सास, ससुर और कुटुम्बी सभीको प्यारी हैं॥ ४॥

**दो०** 
> पिता जनक भूपाल मनि ससुर भानुकुल भानु।  
> पति रबिकुल कैरव बिपिन बिधु गुन रूप निधानु॥५८॥

भावार्थ: इनके पिता जनकजी राजाओंके शिरोमणि हैं; ससुर सूर्यकुलके सूर्य हैं और पति सूर्यकुलरूपी कुमुदवनको खिलानेवाले चन्द्रमा तथा गुण और रूपके भण्डार हैं॥ ५८ ॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-57  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-59

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
