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title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 51"
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# अयोध्याकाण्ड · दोहा 51

श्रीराम-कौसल्या-संवाद

**चौ०** 
> उतरु न देइ दुसह रिस रूखी। मृगिन्ह चितव जनु बाघिनि भूखी॥  
> ब्याधि असाधि जानि तिन्ह त्यागी। चलीं कहत मतिमंद अभागी॥१॥

भावार्थ: कैकेयी कोई उत्तर नहीं देती, वह दुःसह क्रोधके मारे रूखी ( बेमुरव्वत ) हो रही है। ऐसे देखती है मानो भूखी बाघिन हरिनियोंको देख रही हो। तब सखियोंने रोगको असाध्य समझकर उसे छोड़ दिया। सब उसको मन्दबुद्धि, अभागिनी कहती हुई चल दीं॥१॥

**चौ०** 
> राजु करत यह दैअँ बिगोई। कीन्हेसि अस जस करइ न कोई॥  
> एहि बिधि बिलपहिं पुर नर नारीं। देहिं कुचालिहि कोटिक गारीं॥२॥

भावार्थ: राज्य करते हुए इस कैकेयीको दैवने नष्ट कर दिया। इसने जैसा कुछ किया, वैसा कोई भी न करेगा! नगरके सब स्त्री-पुरुष इस प्रकार विलाप कर रहे हैं और उस कुचाली कैकेयीको करोड़ों गालियाँ दे रहे हैं॥२॥

**चौ०** 
> जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा॥  
> बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी॥३॥

भावार्थ: लोग विषमज्वर ( भयानक दुःखकी आग ) से जल रहे हैं। लंबी साँसें लेते हुए वे कहते हैं कि श्रीरामचन्द्रजीके बिना जीनेकी कौन आशा है। महान्‌ वियोग [ की आशंका ] से प्रजा ऐसी व्याकुल हो गयी है मानो पानी सूखनेके समय जलचर जीवोंका समुदाय व्याकुल हो!॥३॥

**चौ०** 
> अति बिषाद बस लोग लोगाईं। गए मातु पहिं रामु गोसाईं॥  
> मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ॥४॥

भावार्थ: सभी पुरुष और स्त्रियाँ अत्यन्त विषादके वश हो रहे हैं। स्वामी श्रीरामचन्द्रजी माता कौसल्याके पास गये। उनका मुख प्रसन्न है और चित्तमें चौगुना चाव ( उत्साह ) है। यह सोच मिट गया है कि राजा कहीं रख न लें। [ श्रीरामजीको राजतिलककी बात सुनकर विषाद हुआ था कि सब भाइयोंको छोड़कर बड़े भाई मुझको ही राजतिलक क्यों होता है। अब माता कैकेयीकी आज्ञा और पिताकी मौन सम्मति पाकर वह सोच मिट गया। ]॥४॥

**दो०** 
> नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।  
> छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान॥५१॥

भावार्थ: श्रीरामचन्द्रजीका मन नये पकड़े हुए हाथीके समान और राजतिलक उस हाथीके बाँधनेकी काँटेदार लोहेकी बेड़ीके समान है। ‘वन जाना है’ यह सुनकर, अपनेको बन्धनसे छूटा जानकर, उनके हृदयमें आनन्द बढ़ गया है॥५१॥

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स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

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