---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 252"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-252"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 252

श्रीवसिष्ठजीका भाषण

**चौ०** 
> पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती॥  
> सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई॥१॥

भावार्थ: अयोध्यापुरीके पुरुष और स्त्री सभी प्रेममें अत्यन्त मग्न हो रहे हैं। उनके दिन पलके समान बीत जाते हैं। जितनी सासुएँ थीं, उतने ही वेष ( रूप ) बनाकर सीताजी सब सासुओंकी आदरपूर्वक एक-सी सेवा करती हैं॥१॥

**चौ०** 
> लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ॥  
> सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं॥२॥

भावार्थ: श्रीरामचन्द्रजीके सिवा इस भेदको और किसीने नहीं जाना। सब मायाएँ [ पराशक्ति महामाया ] श्रीसीताजीकी मायामें ही हैं। सीताजीने सासुओंको सेवासे वशमें कर लिया। उन्होंने सुख पाकर सीख और आशीर्वाद दिये॥२॥

**चौ०** 
> लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई॥  
> अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई॥३॥

भावार्थ: सीताजीसमेत दोनों भाइयों ( श्रीराम-लक्ष्मण ) को सरल स्वभाव देखकर कुटिल रानी कैकेयी भरपेट पछतायी। वह पृथ्वी तथा यमराजसे याचना करती है, किन्तु धरती बीच ( फटकर समा जानेके लिये रास्ता ) नहीं देती और विधाता मौत नहीं देता॥३॥

**चौ०** 
> लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं॥  
> यहु संसउ सब के मन माहीं। राम गवनु बिधि अवध कि नाहीं॥४॥

भावार्थ: लोक और वेदमें प्रसिद्ध है और कवि ( ज्ञानी ) भी कहते हैं कि जो श्रीरामजीसे विमुख हैं उन्हें नरकमें भी ठौर नहीं मिलती। सबके मनमें यह सन्देह हो रहा था कि हे विधाता! श्रीरामचन्द्रजीका अयोध्या जाना होगा या नहीं॥४॥

**दो०** 
> निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।  
> नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच॥२५२॥

भावार्थ: भरतजीको न तो रातको नींद आती है, न दिनमें भूख ही लगती है। वे पवित्र सोचमें ऐसे विकल हैं, जैसे नीचे ( तल ) के कीचड़में डूबी हुई मछलीको जलकी कमीसे व्याकुलता होती है॥२५२॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-251  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-253

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
