---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 245"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-245"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 245

**चौ०** 
> गुरतिय पद बंदे दुहु भाईं। सहित बिप्रतिय जे सँग आईं॥  
> गंग गौरि सम सब सनमानीं। देहिं असीस मुदित मृदु बानीं॥१॥

भावार्थ: फिर दोनों भाइयोंने ब्राह्मणोंकी स्त्रियोंसहित—जो भरतजीके साथ आयी थीं, गुरुजीकी पत्नी अरुन्धतीजीके चरणोंकी वन्दना की और उन सबका गङ्गाजी तथा गौरीजीके समान सम्मान किया। वे सब आनन्दित होकर कोमल वाणीसे आशीर्वाद देने लगीं॥ १ ॥

**चौ०** 
> गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेंटी संपति अति रंका॥  
> पुनि जननी चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता॥२॥

भावार्थ: तब दोनों भाई पैर पकड़कर सुमित्राजीकी गोदमें जा चिपटे। मानो किसी अत्यन्त दरिद्रको सम्पत्तिसे भेंट हो गयी हो। फिर दोनों भाई माता कौसल्याजीके चरणोंमें गिर पड़े। प्रेमके मारे उनके सारे अंग शिथिल हैं॥ २ ॥

**चौ०** 
> अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए॥  
> तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू॥३॥

भावार्थ: बड़े ही स्नेहसे माताने उन्हें हृदयसे लगा लिया और नेत्रोंसे बहे हुए प्रेमाश्रुओंके जलसे उन्हें नहला दिया। उस समयके हर्ष और विषादको कवि कैसे कहे? जैसे गूँगा स्वादको कैसे बतावे?॥ ३ ॥

**चौ०** 
> मिलि जननिहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ॥  
> पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू॥४॥

भावार्थ: श्रीरघुनाथजीने छोटे भाई लक्ष्मणजीसहित माता कौसल्यासे मिलकर गुरुसे कहा कि आश्रमपर पधारिये। तदनन्तर मुनीश्वर वसिष्ठजीकी आज्ञा पाकर अयोध्यावासी सब लोग जल और थलका सुभीता देख-देखकर उतर गये॥ ४॥

**दो०** 
> महिसुर मंत्री मातु गुर गने लोग लिए साथ।  
> पावन आश्रम गवनु किय भरत लखन रघुनाथ॥२४५॥

भावार्थ: ब्राह्मण, मन्त्री, माताएँ और गुरु आदि गिने-चुने लोगोंको साथ लिये हुए, भरतजी, लक्ष्मणजी और श्रीरघुनाथजी पवित्र आश्रमको चले॥ २४५ ॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-244  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-246

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
