---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 235"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-235"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 235

**चौ०** 
> सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने॥  
> भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू॥१॥

भावार्थ: भरतजीने सेवक ( गुह ) के सब वचन सत्य जाने और वे आश्रमके समीप जा पहुँचे। वहाँके वन और पर्वतोंके समूहको देखा तो भरतजी इतने आनन्दित हुए मानो कोई भूखा अच्छा अन्न ( भोजन ) पा गया हो॥१॥

**चौ०** 
> ईति भीति जनु प्रजा दुखारी। त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी॥  
> जाइ सुराज सुदेस सुखारी। होहिं भरत गति तेहि अनुहारी॥२॥

भावार्थ: जैसे ईतिके भयसे दुःखी हुई और तीनों ( आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक ) तापों तथा क्रूर ग्रहों और महामारियोंसे पीड़ित प्रजा किसी उत्तम देश और उत्तम राज्यमें जाकर सुखी हो जाय, भरतजीकी गति ( दशा ) ठीक उसी प्रकारकी हो रही है॥२॥

**चौ०** 
> राम बास बन संपति भ्राजा। सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा॥  
> सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू। बिपिन सुहावन पावन देसू॥३॥

भावार्थ: श्रीरामचन्द्रजीके निवाससे वनकी सम्पत्ति ऐसी सुशोभित है मानो अच्छे राजाको पाकर प्रजा सुखी हो। सुहावना वन ही पवित्र देश है। विवेक उसका राजा है और वैराग्य मन्त्री है॥३॥

**चौ०** 
> भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी॥  
> सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ॥४॥

भावार्थ: यम ( अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह ) तथा नियम ( शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वरप्रणिधान ) योद्धा हैं। पर्वत राजधानी है, शान्ति तथा सुबुद्धि दो सुन्दर पवित्र रानियाँ हैं। वह श्रेष्ठ राजा राज्यके सब अङ्गोंसे पूर्ण है और श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंके आश्रित रहनेसे उसके चित्तमें चाव ( आनन्द या उत्साह ) है॥४॥

**दो०** 
> जीति मोह महिपालु दल सहित बिबेक भुआलु।  
> करत अकंटक राजु पुरँ सुख संपदा सुकालु॥२३५॥

भावार्थ: मोहरूपी राजाको सेनासहित जीतकर विवेकरूपी राजा निष्कण्टक राज्य कर रहा है। उसके नगरमें सुख, सम्पत्ति और सुकाल वर्तमान है॥२३५॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-234  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-236

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
