---
title: "अयोध्याकाण्ड दोहा 225"
canonical: "https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-225"
lang: "hi"
---

# अयोध्याकाण्ड · दोहा 225

श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध

**चौ०** 
> मंगल सगुन होहिं सब काहू। फरकहिं सुखद बिलोचन बाहू॥  
> भरतहि सहित समाज उछाहू। मिलिहहिं रामु मिटिहि दुख दाहू॥१॥

भावार्थ: सबको मङ्गलसूचक शकुन हो रहे हैं। सुख देनेवाले [पुरुषोंके दाहिने और स्त्रियोंके बायें] नेत्र और भुजाएँ फड़क रही हैं। समाजसहित भरतजीको उत्साह हो रहा है कि श्रीरामचन्द्रजी मिलेंगे और दुःखका दाह मिट जायगा॥ १ ॥

**चौ०** 
> करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके॥  
> सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं॥२॥

भावार्थ: जिसके जीमें जैसा है, वह वैसा ही मनोरथ करता है। सब स्नेहरूपी मदिरासे छके ( प्रेममें मतवाले हुए ) चले जा रहे हैं। अङ्ग शिथिल हैं, रास्तेमें पैर डगमगा रहे हैं और प्रेमवश विह्वल वचन बोल रहे हैं॥ २॥

**चौ०** 
> रामसखाँ तेहि समय देखावा। सैल सिरोमनि सहज सुहावा॥  
> जासु समीप सरित पय तीरा। सीय समेत बसहिं दोउ बीरा॥३॥

भावार्थ: रामसखा निषादराजने उसी समय स्वाभाविक ही सुहावना पर्वतशिरोमणि कामदगिरि दिखलाया, जिसके निकट ही पयस्विनी नदीके तटपर सीताजीसमेत दोनों भाई निवास करते हैं॥ ३ ॥

**चौ०** 
> देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा॥  
> प्रेम मगन अस राजसमाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू॥४॥

भावार्थ: सब लोग उस पर्वतको देखकर ‘जानकी-जीवन श्रीरामचन्द्रजीकी जय हो।’ ऐसा कहकर दण्डवत्-प्रणाम करते हैं। राजसमाज प्रेममें ऐसा मग्न है मानो श्रीरघुनाथजी अयोध्याको लौट चले हों॥ ४॥

**दो०** 
> भरत प्रेमु तेहि समय जस तस कहि सकइ न सेषु।  
> कबिहि अगम जिमि ब्रह्मसुखु अह मम मलिन जनेषु॥२२५॥

भावार्थ: भरतजीका उस समय जैसा प्रेम था, वैसा शेषजी भी नहीं कह सकते। कविके लिये तो वह वैसा ही अगम है जैसा अहंता और ममतासे मलिन मनुष्योंके लिये ब्रह्मानन्द!॥ २२५ ॥

Previous: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-224  
Kand: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand  
Next: https://ramayana.com/hi/ramcharitmanas/ayodhya-kand/doha-226

---

स्रोत: गीताप्रेस, गोरखपुर। पुस्तक खरीदें: https://gitapress.org/product/sri-ramcharitmanas-special-edition

Ramayana.com, वेदव्यास फ़ाउंडेशन। निःशुल्क, विज्ञापन रहित।
